यशपाल की 'लखनवी अंदाज' - कहानी का सारांश एवं व्यंग्य (NCERT Class 10 Hindi)

यशपाल 05 Aug, 2026 10 बार पढ़ा गया

कहानी का मुख्य संदेश:

यह पाठ पतनशील सामंती वर्ग पर करारा व्यंग्य करता है, जो वास्तविकता से परे बनावटी जीवनशैली और झूठी शान-शौकत में जीने का दिखावा करता है।

पाठ का सारांश:

लेखक ट्रेन के सेकंड क्लास डिब्बे में यात्रा कर रहे थे। वहाँ लखनवी नवाब साहब अकेले बैठे थे और उन्होंने सामने खीरे रखे हुए थे। लेखक के आने से नवाब साहब के एकांत में बाधा पड़ी। नवाब साहब ने अपनी नफासत और नवाबी शान दिखाने के लिए खीरे को बहुत करीने से धोया, छिला, काटा और उस पर नमक-मिर्च छिड़का।

लेकिन खाने के बजाय उन्होंने खीरे की फांकों को केवल सूंघा और खिड़की से बाहर फेंक दिया। इसके बाद उन्होंने डकार लेकर जताया कि उनका पेट भर गया है। लेखक इस बनावटी और दिखावटी जीवनशैली को देखकर हैरान रह गए और उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि बिना किसी वास्तविक घटना या विचार के भी केवल कल्पना से कहानी लिखी जा सकती है।

मुख्य पात्र:

  • नवाब साहब: दिखावटी, नफासत पसंद और सामंती सोच का प्रतिनिधित्व करने वाले व्यक्ति।

  • लेखक (यशपाल): बाल की खाल निकालने वाले और सूक्ष्मतम बातों का अवलोकन करने वाले।